हस्त नक्षत्र – स्वामी, देवता, नाम अक्षर, स्वभाव और मिलान
हस्तकला में निपुण, हाजिरजवाब और साधनसंपन्न; शिल्प, चिकित्सा और व्यापार में कुशल।
| क्रम | 13 / 27 |
|---|---|
| विस्तार | Virgo 10°00′ – Virgo 23°20′ |
| राशि | कन्या |
| स्वामी ग्रह (दशा) | चंद्र – 10 वर्ष महादशा |
| देवता | Savitr (Surya) |
| गण | देव |
| नाड़ी | आदि |
| योनि | महिष |
| नाम अक्षर | पू, ष, ण, ठ |
चरण अनुसार राशि और नाम अक्षर
| चरण | अक्षर | राशि |
|---|---|---|
| 1 | पू | कन्या |
| 2 | ष | कन्या |
| 3 | ण | कन्या |
| 4 | ठ | कन्या |
सबसे अच्छा गुण मिलान
हमारे अष्टकूट इंजन से, हस्त (वर) के साथ पहले चरण पर आधारित:
- चित्रा – 28/36
- स्वाति – 27.5/36
- उत्तराषाढ़ा – 27.5/36
- पुष्य – 27/36
- उत्तर भाद्रपद – 26.5/36
- रेवती – 26.5/36
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हस्त नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
हस्त नक्षत्र के चार चरणों के नाम अक्षर हैं: चरण 1 – पू, चरण 2 – ष, चरण 3 – ण, चरण 4 – ठ।
हस्त नक्षत्र का स्वामी कौन है?
हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्र हैं, इसलिए इस नक्षत्र में जन्मे जातक की पहली महादशा चंद्र की होती है (पूर्ण अवधि 10 वर्ष)।
हस्त नक्षत्र किस राशि में आता है?
चरण 1: कन्या, चरण 2: कन्या, चरण 3: कन्या, चरण 4: कन्या।