आश्लेषा नक्षत्र – स्वामी, देवता, नाम अक्षर, स्वभाव और मिलान
चतुर, सूक्ष्मदर्शी और प्रभावशाली; लोगों को गहराई से समझते हैं, शंका से बचना चाहिए।
| क्रम | 9 / 27 |
|---|---|
| विस्तार | Cancer 16°40′ – Cancer 29°60′ |
| राशि | कर्क |
| स्वामी ग्रह (दशा) | बुध – 17 वर्ष महादशा |
| देवता | Nagas |
| गण | राक्षस |
| नाड़ी | अन्त्य |
| योनि | मार्जार |
| नाम अक्षर | डी, डू, डे, डो |
चरण अनुसार राशि और नाम अक्षर
| चरण | अक्षर | राशि |
|---|---|---|
| 1 | डी | कर्क |
| 2 | डू | कर्क |
| 3 | डे | कर्क |
| 4 | डो | कर्क |
सबसे अच्छा गुण मिलान
हमारे अष्टकूट इंजन से, आश्लेषा (वर) के साथ पहले चरण पर आधारित:
गंडमूल दोष
यह गंडमूल नक्षत्र है। शांति हेतु नक्षत्र देवताओं की पूजा और हवन किया जाता है।
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आश्लेषा नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
आश्लेषा नक्षत्र के चार चरणों के नाम अक्षर हैं: चरण 1 – डी, चरण 2 – डू, चरण 3 – डे, चरण 4 – डो।
आश्लेषा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
आश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध हैं, इसलिए इस नक्षत्र में जन्मे जातक की पहली महादशा बुध की होती है (पूर्ण अवधि 17 वर्ष)।
आश्लेषा नक्षत्र किस राशि में आता है?
चरण 1: कर्क, चरण 2: कर्क, चरण 3: कर्क, चरण 4: कर्क।
क्या आश्लेषा गंडमूल नक्षत्र है?
हां, आश्लेषा छह गंडमूल नक्षत्रों में से एक है। परंपरा अनुसार जन्म के 27वें दिन या उसी नक्षत्र के आने पर गंडमूल शांति पूजा कराई जाती है।