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अश्विनी नक्षत्र – स्वामी, देवता, नाम अक्षर, स्वभाव और मिलान

तेज, ऊर्जावान और पहल करने वाले; दूसरों की शीघ्र सहायता और उपचार का स्वाभाविक गुण।

क्रम1 / 27
विस्तारAries 0°00′ – Aries 13°20′
राशिमेष
स्वामी ग्रह (दशा)केतु – 7 वर्ष महादशा
देवताAshwini Kumaras
गणदेव
नाड़ीआदि
योनिअश्व
नाम अक्षरचू, चे, चो, ला

चरण अनुसार राशि और नाम अक्षर

चरणअक्षरराशि
1चूमेष
2चेमेष
3चोमेष
4लामेष

सबसे अच्छा गुण मिलान

हमारे अष्टकूट इंजन से, अश्विनी (वर) के साथ पहले चरण पर आधारित:

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गंडमूल दोष

यह गंडमूल नक्षत्र है। शांति हेतु नक्षत्र देवताओं की पूजा और हवन किया जाता है।

गंडमूल शांति पूजा देखें

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FAQ

अश्विनी नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?

अश्विनी नक्षत्र के चार चरणों के नाम अक्षर हैं: चरण 1 – चू, चरण 2 – चे, चरण 3 – चो, चरण 4 – ला।

अश्विनी नक्षत्र का स्वामी कौन है?

अश्विनी नक्षत्र के स्वामी केतु हैं, इसलिए इस नक्षत्र में जन्मे जातक की पहली महादशा केतु की होती है (पूर्ण अवधि 7 वर्ष)।

अश्विनी नक्षत्र किस राशि में आता है?

चरण 1: मेष, चरण 2: मेष, चरण 3: मेष, चरण 4: मेष।

क्या अश्विनी गंडमूल नक्षत्र है?

हां, अश्विनी छह गंडमूल नक्षत्रों में से एक है। परंपरा अनुसार जन्म के 27वें दिन या उसी नक्षत्र के आने पर गंडमूल शांति पूजा कराई जाती है।