पुनर्वसु नक्षत्र – स्वामी, देवता, नाम अक्षर, स्वभाव और मिलान
आशावादी, उदार और क्षमाशील; हर बार फिर उठ खड़े होते हैं, घर-परिवार से गहरा लगाव।
| क्रम | 7 / 27 |
|---|---|
| विस्तार | Gemini 20°00′ – Cancer 3°20′ |
| राशि | मिथुन, कर्क |
| स्वामी ग्रह (दशा) | गुरु – 16 वर्ष महादशा |
| देवता | Aditi |
| गण | देव |
| नाड़ी | आदि |
| योनि | मार्जार |
| नाम अक्षर | के, को, हा, ही |
चरण अनुसार राशि और नाम अक्षर
| चरण | अक्षर | राशि |
|---|---|---|
| 1 | के | मिथुन |
| 2 | को | मिथुन |
| 3 | हा | मिथुन |
| 4 | ही | कर्क |
सबसे अच्छा गुण मिलान
हमारे अष्टकूट इंजन से, पुनर्वसु (वर) के साथ पहले चरण पर आधारित:
- स्वाति – 27/36
- पूर्वाषाढ़ा – 27/36
- उत्तर भाद्रपद – 27/36
- पूर्व फाल्गुनी – 26.5/36
- भरणी – 26/36
- आर्द्रा – 26/36
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पुनर्वसु नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
पुनर्वसु नक्षत्र के चार चरणों के नाम अक्षर हैं: चरण 1 – के, चरण 2 – को, चरण 3 – हा, चरण 4 – ही।
पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी कौन है?
पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी गुरु हैं, इसलिए इस नक्षत्र में जन्मे जातक की पहली महादशा गुरु की होती है (पूर्ण अवधि 16 वर्ष)।
पुनर्वसु नक्षत्र किस राशि में आता है?
चरण 1: मिथुन, चरण 2: मिथुन, चरण 3: मिथुन, चरण 4: कर्क।