मूल नक्षत्र – स्वामी, देवता, नाम अक्षर, स्वभाव और मिलान
मूल तक पहुँचने वाले; दार्शनिक और शोधप्रिय। गंडमूल नक्षत्र।
| क्रम | 19 / 27 |
|---|---|
| विस्तार | Sagittarius 0°00′ – Sagittarius 13°20′ |
| राशि | धनु |
| स्वामी ग्रह (दशा) | केतु – 7 वर्ष महादशा |
| देवता | Nirriti |
| गण | राक्षस |
| नाड़ी | आदि |
| योनि | श्वान |
| नाम अक्षर | ये, यो, भा, भी |
चरण अनुसार राशि और नाम अक्षर
| चरण | अक्षर | राशि |
|---|---|---|
| 1 | ये | धनु |
| 2 | यो | धनु |
| 3 | भा | धनु |
| 4 | भी | धनु |
सबसे अच्छा गुण मिलान
हमारे अष्टकूट इंजन से, मूल (वर) के साथ पहले चरण पर आधारित:
- चित्रा – 27/36
- विशाखा – 27/36
- पूर्वाषाढ़ा – 27/36
- रेवती – 26.5/36
- उत्तराषाढ़ा – 24.5/36
- मघा – 24/36
गंडमूल दोष
यह गंडमूल नक्षत्र है। शांति हेतु नक्षत्र देवताओं की पूजा और हवन किया जाता है।
गंडमूल शांति पूजा देखें← ज्येष्ठा · पूर्वाषाढ़ा →
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मूल नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
मूल नक्षत्र के चार चरणों के नाम अक्षर हैं: चरण 1 – ये, चरण 2 – यो, चरण 3 – भा, चरण 4 – भी।
मूल नक्षत्र का स्वामी कौन है?
मूल नक्षत्र के स्वामी केतु हैं, इसलिए इस नक्षत्र में जन्मे जातक की पहली महादशा केतु की होती है (पूर्ण अवधि 7 वर्ष)।
मूल नक्षत्र किस राशि में आता है?
चरण 1: धनु, चरण 2: धनु, चरण 3: धनु, चरण 4: धनु।
क्या मूल गंडमूल नक्षत्र है?
हां, मूल छह गंडमूल नक्षत्रों में से एक है। परंपरा अनुसार जन्म के 27वें दिन या उसी नक्षत्र के आने पर गंडमूल शांति पूजा कराई जाती है।